Unsuitable Friend

 दोस्तों आज का मेरा ये blog मेरे एक खास दोस्त के बारे में बताता है,जो एक लड़का था लेकिन अब लड़की है...पढ़कर अजीब लग रहा होगा कि ये कैसा दोस्त है भला...

हम एक ही गली में रहते हैं, बचपन में हम एक साथ ही खेला करते थे थोड़े बड़े हुए तो काम भी साथ ही किया करते और पढ़ाई भी साथ में ही की। उसे लड़कियां शुरू से ही पसंद ना थी।

Highschool तक तो सबकुछ ठीक था मगर उसके बाद हमने अलग अलग स्कूल में जाने का फैसला किया उसने एक अच्छा प्राइवेट स्कूल चुना और मैंने सरकारी विद्यालय।

प्राइवेट स्कूल में उसके कुछ ऐसे दोस्त बन गए जिनकी संगत करना उसे भारी पड़ गया।

स्त्रीस्वभावी तो वह पहले से ही था मगर उनकी संगत ने उसे इस कदर बिगाड़ दिया कि अब वह एक लड़की बनना चाहता था। क्युकी उसे लड़कों में Interest था।

सुंदर और सुडौल लड़के उसे भाने लगे थे,

समय के साथ इंटरमीडिएट की परीक्षाएं हुई और हम रिजल्ट वाले दिन मिले। उसका स्कोर मुझसे कुछ कम था।।

पूछने पर उसने बताया कि उसका अब पढ़ाई में मन नहीं लगता है उसकी मंजिल उसके सपने  अब कुछ और ही हैं।

मैंने उसे समझाया कि यह समाज इस प्रकार के लोगों को स्वीकार नहीं करता है मगर उसने अब मन बना लिया था कि वह आगे की पढ़ाई नहीं करेगा और भविष्य में लड़की बन जाएगा।

उसके इस स्वभाव से उसके घर वाले भी परेशान होने लगे क्योंकि वह अब रात रात भर घर से बाहर रहने लगा  गलत काम करने लगा।

लोगों ने मुझे सलाह दी की अब मुझे उस से दोस्ती तोड़ देनी चाहिए और उससे दूर रहना चाहिए।

मेरे घर वालों ने मुझे सलाह दी कि अब मुझे उसके साथ नहीं रहना चाहिए क्योंकि उन्हें लगता था कि मैं उसकी संगत में बिगड़ न जाऊँ मैंने कहा क्या पता मेरे साथ बो ही सुधर जाए। मगर अब कुछ नहीं हो सकता था।

फिर भी मैंने उसका साथ नहीं छोड़ा मैंने स्वीकार कर लिया एक Unsuitable Friend..






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